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Tuesday, 8 October 2013

मंदिर जैसी मां...

















सुबह खुद चार पर उठकर,
हमें मां ने जगाया है।
कठिन प्रश्नों के हल क्या हैं,
बड़े ढंग से बताया है।

किताबें क्या रखें कितनी रखें,
हम आज बस्ते में,
सलीके से हमारे बेग को,
मां ने जमाया है।

बनाई चाय अदरक की,
परांठे भी बनाए हैं।
हमारे लंच पैकिट को,
करीने से सजाया है।

हमारे जन्म दिन पर आज खुद,
मां ने बगीचे में।
बड़ा सुंदर सलोना-सा,
हरा पौधा लगाया है।

फरिश्तों ने धरा पर,
प्रेम करुणा और ममता को।
मिलाकर मां सरीखा दिव्य,
एक मंदिर बनाया है।