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Thursday, 10 October 2013

माँ तेरे हैं नाम अनेक



माँ तेरे हैं नाम अनेक,
कैसे तुम्हे पुकारे हम?
तुम जीवन का अमर स्रोत,
छोटे से हैं जल धारे हम।।
जीवन का निर्माण तुम्ही से,
तुमसे ही पलती सृष्टि।
सभी कष्ट मिट जाएँ माता,
जहाँ पड़े तेरी दृष्टि।
बहुत कष्ट सह कर आये हैं,
माता तेरे द्वारे हम।
तुम जीवन का अमर स्रोत,
छोटे से हैं जल धारे हम।।1।।
तुम ही बंधन, तुम ही मुक्ति,
तुमसे ही संसार सकल।
हर प्राणी का प्राण तुम्ही हो,
फिर क्यों है संसार विकल?
तुम कण कण में बसी हुई हो,
कैसे तुम्हे निहारे हम?
तुम जीवन का अमर स्रोत,
छोटे से हैं जल धारे हम।।2।।