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Saturday, 26 October 2013

वक्त

बंद मुट्ठी से रेत की तरह
वक्त फिसलता जाएगा।
हर बार की तरह इस बार भी
हाथ मलता रह जाएगा।
आज वक्त को बर्बाद कर
कल तू पछताएगा।

आज न जागा तो तू
कल ना मंजिल पाएगा,
अगर तू ऐसा ही रहा तो
वक्त से कदम न मिला पाएगा,
वक्त आएगा और चला जाएगा
तू देखता रह जाएगा।

कदम बढ़ा, प्रयास कर,
तभी तू लक्ष्य पाएगा,
तेरे सफल प्रयासों से कल तेरा पाठ
स्वर्णिम इतिहास में पढ़ाया जाएगा।