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Friday, 13 September 2013

कीमत हँसी की.....

हर हँसी की क़ीमत

अश्कों से चुकायी हमने
पता नही और कितना
कर्ज़ रहा है बाक़ी
आँसू हैं, कि, थमते नही!

जिन्हे खोके आँखें रोयीं,
तनहा हुए, खातिर जिनकी,
वो कहाँ है ये भी
अब हमे ख़बर नही,
दुआ है निकलती
उनके लिए, फिर भी......

पलके मूँद के भी,
नींदे हैं उड़ जातीं,
वीरान बस्ती मे दिल की
वो बसते हैं आज भी!
तकते है राह आज भी...

सिर्फ़ दरवाज़े नही,
हर खिड़की, बंद कर ली,
ना है, दरार कहीँ,
दूसरा आये कोई,
गुंजाईश रखी नही !

ये है,कैसी हैरानी,
हमारी दूर से भी
ख़बर ख़ूब है रहती
हर हँसी पे हमारी,
रखी है पहरेदारी...

होटों पे आये तो सही
सौगाते ग़म और मायूसी,
बसी है, हैं पास ही ...!
चाहे हो हल्की-सी
झपटी जाए,वो हँसी...