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Friday, 31 January 2014

आइये जानते हैं विश्व के कुछ सर्वाधिक आश्चर्यजनक मंदिरों के बारे में......

आज विश्व हिन्दू तथा बौद्ध धर्म की प्राचीनता को खुले दिल से स्वीकार कर चूका है. साथ ही इन धर्मों के आराधना स्थल भी विश्व के आकर्षण का केंद्र हैं. इनमे से बहुत से मंदिर पुरातात्विक व ऐतिहासिक हैं जो अपनी स्थापत्य कला के लिए भी विश्व धरोहर बन चुके हैं.दुनिया जैसे-जैसे भौतिकता की तरफ़ बढ़ रही है, वैसे-वैसे हिन्दू, बौद्ध तथा सिख धर्म की ध्यान, योग एवं आराधना पद्धति तथा संयमित जीवन यापन शैली भी लोकप्रिय होती जा रही है. आइये जानते हैं ऐसे ही विश्व के कुछ सर्वाधिक आश्चर्यजनक मंदिरों के बारे में. 


स्वर्ण मंदिर (अमृतसर) - विश्व प्रसिद्ध स्वर्ण मंदिर भारत के पंजाब प्रान्त में अमृतसर शहर में है जिसे हरमंदिर साहिब या दरबार साहिब नाम से भी जाना जाता है. यह सिख धर्म के अनुयायियों का एक प्रमुख केंद्र है जिसका निर्माण सिखों के पांचवें गुरु गुरु अर्जन देव ने १६वीं शताब्दी में कराया था. सिखों का पवित्र धर्मग्रन्थ श्री गुरु ग्रन्थ साहिब इसी गुरूद्वारे में स्थापित है.



की गोम्पा (स्पीति घाटी) - हिमाचल प्रदेश के लाहौल तथा स्पीति जिले की स्पीति घाटियों में समुद्र तल से ४१६६ मीटर की ऊंचाई पर एक पहाड़ी की चोटी पर स्थित ये एक तिब्बती बौद्ध मठ है. यह स्पीति घाटी में स्थित सभी मठों में सबसे बड़ा मठ है तथा लामाओं का धार्मिक प्रशिक्षण केंद्र है जो ११वीं शताब्दी में बनाया गया था.



ताक्त्संग पाल्फुग मठ (पारो घाटी) - पारो ताक्त्संग या टाइगर नेस्ट के नाम से भी जाना जाने वाला ये बौद्ध मठ एक पवित्र स्थल है जो हिमालय पर्वतमाला में भूटान की पारो घाटी में स्थित है. इस मठ का निर्माण १६९२ ईस्वी में किया गया था. इस मठ में आठ गुफाएँ हैं जिनमे से चार में आना जाना तो आसान है किन्तु बाकी चार गुफाओं में जाना अत्यंत दुष्कर है.



वाट रोंग खुन (चियांग राइ) - थाईलैंड के चियांग राइ शहर के दक्षिण में स्थित यह एक समकालीन बौद्ध मठ है जो पर्यटकों के मध्य श्वेत मंदिर या व्हाइट टेम्पल नाम से प्रसिद्ध है. हालाँकि यह कोई पारंपरिक बौद्ध मंदिर नहीं है फ़िर भी इस मंदिर में चारों तरफ़ आप बौद्धिक शास्त्रों में वर्णित प्रसंग और शिक्षाएं देख सकते हैं. इस मंदिर का निर्माण १९९७ ईस्वी में हुआ था.



अंगकोर वाट (सीएम राप) - कम्बोडिया के सीएम राप प्रान्त में अंगकोर में स्थित यह एक प्राचीन हिन्दू मंदिर है जो बाद में एक बौद्ध मंदिर के रूप में उपयोग में लाया जाने लगा. यह विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक स्थल है जिसका निर्माण १२वीं शताब्दी में ख्मेर शासक सूर्यवर्मन द्वितीय द्वारा कराया गया. इस मंदिर के केंद्र में प्रमुख आराध्य देव के रूप में भगवान विष्णु का मंदिर स्थापित है.



प्रम्बनन मंदिर (जावा) - ९वीं शताब्दी का यह प्राचीन हिन्दू मंदिर इंडोनेशिया के जावा प्रान्त में स्थित है और देव-त्रयी ब्रह्मा, विष्णु एवं महेश को समर्पित है. यह इंडोनेशिया में सबसे बड़ा एवं दक्षिण-पूर्व एशिया के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है. मुख्य मंदिर के बिलकुल केंद्र में स्थित है शिव मंदिर जो अन्य सभी मंदिरों में सबसे बड़ा है. मंदिर के अन्दर फलकों पर रामायण के प्रसंगों के चित्र खुदे हुए हैं.



श्री रंगनाथस्वामी मंदिर (तिरुचिरापल्ली) - यह हिन्दू मंदिर तमिलनाडु प्रान्त के तिरुचिरापल्ली जिले में स्थित है जो हिन्दू देवता विष्णु के एक अन्य रूप श्री रंगनाथ को समर्पित है. यहाँ भगवान श्री रंगनाथ शयन की अवस्था में विराजमान है. यह दक्षिण भारत में स्थित वैष्णव मंदिरों में सबसे भव्य है और इसका निर्माण द्रविड़ियन शैली के स्थापत्य नियमों के अनुसार हुआ है.



बोरोबुदूर मंदिर (जावा) - ९वीं शताब्दी का यह महायान बौद्ध मंदिर बाराबुदुर नाम से भी जाना जाता है और इंडोनेशिया के जावा प्रान्त में स्थित है. यह मंदिर छः वर्गाकार चबूतरों पर बना है जिनपे २६७२ नक्काशीदार फलक तथा ५०४ बुद्ध प्रतिमाएं स्थापित है. सबसे ऊँचे चबूतरे के मध्य में एक गुम्बद है जिसके चारों ओर ७२ बुद्ध मूर्तियों छिद्रित स्तूपों में स्थापित है. 


श्वेदागोन पैगोडा (यांगून) - बर्मा के यांगून शहर में स्थित यह बौद्ध पैगोडा ६वीं से १०वीं शताब्दी के मध्य निर्मित माना जाता है और गोल्डेन पैगोडा के नाम से भी प्रसिद्ध है. बुद्ध भिक्षुओं के लिए यह सबसे पवित्र बौद्ध पैगोडा है जिसमे गत चार बुद्ध पीठों के अवशेष स्थित हैं. सिंगुत्तारा की पहाड़ियों पर स्थित यह ९९ मीटर ऊँचा पैगोडा मान्यताओं के अनुसार पिछले २६०० वर्षो से है और बर्मा और विश्व का सबसे प्राचीन पैगोडा है.


स्वर्ग का मंदिर (चोंग्वेन) - चीन की राजधानी बीजिंग के चोंग्वेन जिले में स्थित है यह धार्मिक स्थल. इसे मिंग वंश के शासक योंगले ने १४वीं शताब्दी में बनवाया था और यहाँ मिंग व किंग वंश के शासक अच्छी फ़सल के लिए वार्षिक प्रार्थना समारोह का आयोजन करते थे. वर्ष १९८८ में इस मंदिर को सामान्य जन के लिए खोला गया जिससे लोग प्राचीन दर्शन, इतिहास व धर्म से रूबरू हो सकें.


 जेतवनरामाय स्तूप (अनुराधापुर) - पवित्र वैश्विक धरोहर जेतवन मठ के खंडहरों में स्थित यह स्तूप श्री लंका के अनुराधापुर शहर में स्थित है. इस स्तूप का निर्माण राजा महेशन ने दूसरी शताब्दी के उत्तरार्द्ध में बौद्ध भिक्षु संघमित्ता के उपदेशों के प्रभाववश महाविहार को ध्वंस करा के प्रारंभ कराया था. यह स्तूप ४०० फीट ऊँचा है जो कभी सबसे ऊँचा प्राचीन स्तूप हुआ करता था.



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Via Jagran.